राजसत्ता के अधिष्ठाता भले हो
रंग भरने का हुनर तुममें कहाँ है। तुम तो शोषित रक्त कर कामी बने हो।। करुणा की लयबद्धता को भ्रंश...
रंग भरने का हुनर तुममें कहाँ है। तुम तो शोषित रक्त कर कामी बने हो।। करुणा की लयबद्धता को भ्रंश...
01/05/2008 ये तूफान यू ही नहीं उठे होगे कहीं पापी पेट की अगन से क्षुब्ध हो कर कोई बिलखता चुरा...
बंदरिया आंटी साड़ी बदलती नित - नित नई- नई सारे दिन फिर घूमा करती बाजार- हाट, डेहरी- डेहरी पान चबाती,...
आ चाँद तुझे मैं बताती हूँ, मेरे दिल का हाल सुनाती हूँ। आ चाँद तुझे मैं बताती हूँ,. उसकी याद...
हौसलों का क्या करेंगे जब सलामत सर नहीं कैसे ले परवाज़ वो पंछी कि जिसके पर नहीं //१// इक मुसलसल...
प्रिय भारत! शोध की खातिर किस दुनिया में ? कहां गए ? साक्षात्कार रेणु से लेने ? बातचीत महावीर से...
होता है श्रमशील जो धैर्य वृत्ति के साथ। मधुर वचन सम्मान से पकड़े जन का हाथ।। सदा लक्ष्मी की कृपा...
मुझे अपने अस्तित्व को सार्थक करना है। हस्ती भले ही हो पल दो पल की किंतु सुमन बनकर अपनी महक...
दुःख दर्द मान अपमान चोट घाव चीख आहें कविता इसी दुनिया में बनती बिगड़ती है देखता हूँ कितनी बन सकी...
कल बापू को देखा ! सपने इतने ख़ूबसूरत भी होते हैं ! -सरला माहेश्वरी सपने में ही सही कल बापू...