“हाफरी देखलें केन्ता मीठा!”
लेख/निमाई प्रधान'क्षितिज' यह 'लेथा' है। हमारे कोलता समाज का एक महत्त्वपूर्ण व्यंजन। समाज में कोई भी सामूहिक कार्यक्रम हो,एक शिशु...
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आरुषि इस्लामोफोबिया और हिन्दुफोबिया दोनों एक दूसरे के पूरक प्रश्न है। इन्हीं में से किसी एक शब्द का दूसरे के...
प्रेमचन्द के छोटे बेटे अमृत राय की आज जन्म शती है। अमूमन हम उनके साहित्यिक अवदान पर कम ही बात...
सारे दिन जरूरी , गैरजरूरी कामों में खुद को उलझाए रखती हूं , जानती हूं रात आएगी जो सिर्फ़ मेरी...
भगवान मोरवाल 31 अगस्त और देश के कुछ ऐसे भी हिस्से हैं जहां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को नहीं बल्कि...
पियूष कुमार आज अमृता एक सौ दो की हुईं। इस फानी दुनिया को तो उनके जिस्म ने 2005 में विदा...
अनामिका प्रिया कविताओं में जीवन के नन्हे अनुभव प्रसंगों को व्यापक फलक और विराट अर्थों में व्यक्त करने की क्षमता...
इस खबर के विषय में कल पढ़ा और एक मित्र से डिस्कस भी किया कि मधु कांकरिया जी का उपन्यास...
असग़र वजाहत 'र' ने अपने दोस्त 'स' से कहा - मैं तुम्हारा विकास करना चाहता हूं। 'स' ने जवाब दिया...
रविश कुमार युगोस्लाविया के बिखरने से इतने नए मुल्क बने और इनके आपसी जंग की ख़बरों में मेरी कमज़ोर अंग्रेज़ी...