सुबह-सुबह
जयप्रकाश मानस हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।
जयप्रकाश मानस हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।
पाठ - तेरह लेखिका – जया जादवानी सेतु प्रकाशन ( २०२१ ) प्रथम संस्करण ------------------------------- यह सिर्फ एक पाठकीय प्रतिक्रिया...
वारे मोर पंडकी मैना, तोर कजरेरी नैना मिरगिन कस रेंगना तोर नैना मारे वो चोखी बान, हाय रे तोर नैना...
ख्यात कथाकार हरिसुमन बिष्ट का उपन्यास हवाओं में घिरा आदमी हिंदी साहित्य में एक अनूठी रचना है, जो भूटान की...
प्राचीन दक्षिण कोसल में सातवीं शताब्दी में निर्मित ईंटों का मंदिर अपने कलात्मक वैभव को संजोए हुए है। सिरपुर का...
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज एवं राष्ट्र की उन्नति का मुख्य आधार है।...
दाऊ रामचंद्र देशमुख कृत चंदैनी गोंदा का प्रथम प्रदर्शन 07 नवम्बर 1971 को हुआ था। चंदैनी गोंदा की आज 55...
जयप्रकाश मानस आज का दिन सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, हिंदी साहित्य में एक ऐसे कवि के आगमन का दिन है...
छत्तीसगढ़ के अद्भुत शब्दवेत्ता मुकुंद कौशल की जयंती 7 नवंबर पर विशेष “अनोखा अपनापन” बहुत बरस बीते हमारी उस पहली...
शंभूनाथ सत्य का मुंह विज्ञापनों से भरा है, फिर भी बंद नहीं किया जा सकता! कोलकाता से 30 मई 1826...