“साहित्यिक पत्रिकाएं बंद होने के कगार पर हैं, यह चिंतनीय है”
डॉ विनोद टीबड़ेवाला अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के द्वारा आयोजित हिंदी दिवस के उपलक्ष में संपर्क भाषा के रूप में...
डॉ विनोद टीबड़ेवाला अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के द्वारा आयोजित हिंदी दिवस के उपलक्ष में संपर्क भाषा के रूप में...
मैं किसी और के जैसा,क्यों बनूँ? जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा । दूसरों की नकल क्यों करूँ? मैं अपनी भावनाएँ...
जंगल को बचाने के लिए, पहाड़ पर कविता जाएगी, कुल्हाड़ी की धार के लिए, कमरे में दुआ मांगी जाएगी, पहाड़...
आंखों ने देखने लगे हैं उड़ते बादल । आंखों में तैरने लगे हैं उड़ते बादल ।। आंखों ने देखे थे...
(27 सितंबर से 02 अक्टूबर 2021 तक) अपने साथ एक पूरे युग को लेकर चलनेवाले गाँधी, अपने जीवन में सहजता,...
रेणु की चर्चित कहानी 'तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा होती रही...
दोस्तों...आप सबका प्यार हमारी फिल्म लाल जोहार को मिल रहा है तो जाहिर सी बात है अच्छा लग रहा है....
मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...
मेरी प्रिय सखी कभी-कभी तुम्हारे हिस्से का आसमां और तुम्हारे हिस्से की ज़मी कोई दूसरा ही चुनेगा कुछ पसंदीदा रंगों...
अश्पृश्यता मानव समाज के लिए कलंक रही है। किसी व्यक्ति को जन्म के आधार पर हीन अथवा कमतर समझना जितना...