March 8, 2026

साहित्य

88.5 वे उँगलियों से स्पर्श कर अक्षर चीन्ह लेते थे

अशोक और उनके दृष्टिबाधित मित्रों की दुनिया में वही सब कुछ था जो हमारी दुनिया में था लेकिन उनका रूप...

राजाघाट और घोड़ाघाट, सकरी नदी कवर्धा

पुराने जमाने मे राजा-महाराजा से लेकर आम आदमी तक का गुजारा नदी, तालाब में होता था। तदनुरूप घाट बने होते...

मेघा के बरसे अउ महतारी के परोसे : कहावतों का लोक सन्दर्भ

लोकोक्तियाँ मनुष्य के सामाजिक जीवन के दीर्घकालीन अनुभव के परिणामस्वरूप सृजित होती हैं।इस अनुभव क्षेत्र का दायरा काफी विस्तृत होता...

मेरे पीहर मेरे अंचल के फूल

सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर.. पहाड़ियों पर बसा, बुद्धिजीवियों का नगर! नीचे तराई में छोटा सा गांव ग्वालमंडी! ताज्जुब होता...

प्रकृति की गोद में बसा एक खूबसूरत जिला

कुछ काम से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही आया हूं। प्रकृति की गोद में बसा एक खूबसूरत जिला। कहते हैं- यहां की हवा जादुई...