“कविता गुलमोहर”
ग्रीष्म में शीतल एहसास गुलमोहर को बनाता ख़ास धूप की झुलसाती तपिश में घर से बाहर निकलने की बंदिश में...
ग्रीष्म में शीतल एहसास गुलमोहर को बनाता ख़ास धूप की झुलसाती तपिश में घर से बाहर निकलने की बंदिश में...
1 ख़ूब मुनादी करवा दी है, जश्न मनाओ बस्ती में कल फिर शादी है, जश्न मनाओ सबसे नीचे दबी हुई...
हरियाली देती सबको संदेश, पेड़-पौधे लगाओ, स्वर्ग बने देश ।। उद्योगों की आंधी में, विनाश रूपी विकास में, मत क्षति...
बाबू जी की शिक्षा... जब तक मेरे बाबू जी जीवित रहे मुझे अपने पिता पर सच में बहुत गुमान था...
(1) घास मैं वहां खड़ा हूँ- जहां रास्ता खत्म होता है और सड़क शुरू. हम सड़कों को- रास्ता नहीं कहते...
दुविधा विधा है दुविधा की, हम ख़फा है दुविधा से। मन न हो परेशान दुविधा से। ये तो विधा है...
नवा राज बन के बेरा मे, भारी गदगदाए रहे महराज अब कइसे मुंह चोराए कस रेंगत हस-सुखरा के ताना मंथिर...
सबको बहुत लुभाया करतीं सबका मन हरसाया करतीं सब पर प्रेम लुटाया करतीं प्यारी - प्यारी चिड़ियां कुटिया, बंगला, मंदिर,...
हाँ..मैं भी कह देती अपने दिल की बात जो तुम सुन लेते तो अच्छा होता जुबा़ से कह नहीं पाऊँगी...
मीलों मील अकेले चलना अपना दीपक बनकर जलना सूरज की तो फ़ितरत है ये नित्य नया हो, उगना ढलना बुझे...