October 21, 2026

कविता

“जब नाराज होगी प्रकृति”

समीक्षक- विभूति भूषण झा श्रीमती निमिषा सिंघल सर्वप्रथम “जब नाराज होगी प्रकृति” कविता संग्रह हेतु श्रीमती निमिषा सिंघलजी को मैं...

डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ का जनवादी तेवर

जनकवि की संवेदना व्यक्तिगत नहीं होती। उसकी रचनाओं में सार्वजनिक पीड़ा , मज़दूरों की जुझारू चेतना, व्यवस्था एवं प्रभुत्वसंपन्न वर्ग...

पंखुरी सिन्हा की दो कविताएं

युवा लेखिका, दो हिंदी कथा संग्रह ज्ञानपीठ से, 5 हिंदी कविता संग्रह, दो अंग्रेजी कविता संग्रह। कई किताबें प्रकाशनाधीन। कई...

प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर विशेष कविता

प्रेस-स्वातंत्र्य-दिवस पता नहीं अब है कि कब है ।। अरी ओ आजादी…।। अरी ओ आजादी !मेरी प्यारी आजादी !मेरी स्वप्न-प्रिये...

छत्तीसगढ़ी कविताओं में मजदूर –

छत्तीसगढ़ किसानों और मजदूरों का प्रदेश है। यहाँ के कवियों ने किसानों और मजदूरों की संवेदनाओं को महसूस किया है...

1 मई मजदूर दिवस पर मेरी एक रचना

मजदूर मुट्ठी में बंद उष्णता, सपने, एहसास लिए,खुली आंखों से देखता है कोई …..क्षितिज के उस पार। बंद आंखों से...

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