बगैर कुरसी का कमरा…
संजय शेखर हमारे आसपास कितने महत्वपूर्ण लोग रहते हैं, हम निन्यानबे प्रतिशत लोग इससे बेख़बर होते हैं। दरअसल ज़िन्दगी की...
संजय शेखर हमारे आसपास कितने महत्वपूर्ण लोग रहते हैं, हम निन्यानबे प्रतिशत लोग इससे बेख़बर होते हैं। दरअसल ज़िन्दगी की...
बस्तर को हमने बहुत लंबे समय तक एक ही नजर से देखा—संघर्ष, नक्सल, बंदूक और असुरक्षा की नजर से। इतनी...
रात हुई तो इन आँखों में, जगमग - जगमग तारे आए। दिन में जिनको भूल चुका था! याद मुझे वो...
कुछ स्त्रियाँ तुम्हारी किताबों से इतर हैं तुमारी क़लम उनको रच नही पाई कुछ स्त्रियाँ सिमोन की लेखनी से भी...
बताते थे बुजुर्ग कुछ ऐसे-ऐसे आग नहीं बुझती थी चूल्हे में पकती थी रसोई एक ही चिंगारी से सुलगी आग...
खेत के ठीक बीचों-बीच, बिजूका खामोश खड़ा है, और दूर मेड़ पर मौन है किसान। बिजूके ने ओढ़ी है, किसान...
ईश्वर, मुझे और द्रवीभूत करो— इतना पारभासी कि मुझमें झाँकने वाली हर कुटिल आँख, परछाईं नहीं, अपना वास्तविक चेहरा देख...
डकैतों और अपराधियों के एनकाउंटर की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी लेकिन क्या आपको पता है मध्यप्रदेश में एक...
भारतीय भाषा परिषद कोलकाता द्वारा इस वर्ष हिंदी के वरिष्ठ कवि श्री नरेश सक्सेना को हिंदी कर्तृत्व समग्र सम्मान तथा...
रचनाकार: डॉ. निवेदिता बांदिल दिनांक: 11/04/2026 मैने अभी कुछ कहा भी नहीं था कि तुम समझ लेते हो, मैने अभी...