युद्ध और शांति
युद्ध का बिगुल या, शांति का दान। अंतर नहीं समझते, हम निरा मूर्ख इंसान। युद्ध की विभीषिका, बना रही श्मशान।...
युद्ध का बिगुल या, शांति का दान। अंतर नहीं समझते, हम निरा मूर्ख इंसान। युद्ध की विभीषिका, बना रही श्मशान।...
दिन अउ रात अपन खून पसीना बहाके, सिंचत हे किसान हमर देस के माटी। इहां किसान मेहनत करत रहि जाथे,...
रसिक रचित रचना है प्रेम, या भ्रमित भावना कल्पना है प्रेम। उगता है प्रेम, खेतों खलिहानों में भी, और पकता...
कुछ खूबसूरत लम्हें हमें गुदगुदातें है जब वो पास थे,सबसे खास थे मुझ से भी ज्यादा नजदीक वो मेरे आस...
हाँ ! आसान नहीं होता किसी सच्चे पुरुष के दिल मे रहना नहीं मानता वो अपनी दासी स्त्री को पौरुष...
उसे ख़ुश रहना आता है क्यों कि उसे ख़ुश रहने के लिए बड़ी ख़ुशियाँ नहीं चाहिए वो ख़ुश हो जाती...
_ लक्ष्मीकांत मुकुल सुबह की चंचल किरणें छू रही हैं गंगा के बहाव को उसके आभा से चमकते हैं बनारस...
हर साँस मुन्तज़िर है किसी इम्तिहान को कितना कठिन थामना गिरते मक़ान को । गेहूं को अपने रोए- कोई अपने...
पिता की हथेलियां बेहद खुरदुरी थीं जिनसे हमेशा ग्रीस की महक आती थी जिस कारण मैं हमेशा पिता के स्नेहिल...
चलते-चलते मिले राह में, मिलकर दोनो हर्षाए। मुग्ध हुए द्वय रहे देखते, बोल न अधरों से पाए।। अनजाने वे पथ...