अनामिका चक्रवर्ती की चार कविताएं
आज का दिन और अनुभवों का निचोड़ हम एक बहुत ही बुरे समय में जी रहे हैंलेकिन हम जी इसलिए...
आज का दिन और अनुभवों का निचोड़ हम एक बहुत ही बुरे समय में जी रहे हैंलेकिन हम जी इसलिए...
आँसू गाँव हअपन लइका मन केरद्दाजोहत -जोहत रोवत हे,अँगाकर रोटीरांध केअब आही, तब आहीकहिकेओकर आँखी ह जोहत हे | मोर...
कुछ अरुण-दोहे : पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।। वृक्ष कटे छाया...
दहलीज़ एक दहलीज़ पार करदूसरी दहलीज़ की शोभाबढ़ाती हैं..ये लड़कियां थोड़ा सालाड़ पाते ही..खिलखिलाती हैं। मायके में शुभ कार्यों में..जब...
किताब के समान खुलेंगींयदि आपके घर की खिड़कियांतो अन्य दिनों सेकुछ भिन्न होगा बाहर का दृश्य खिड़की के समान खुलने...
मत करना तुम यह नादानी।।कभी न फ्रिज का पीना पानी।। बार-बार अब छींक सताये।नाक बहुत बहती ही जाये।। दुख देता...
पढ़ा जा रहा न लिखा जा रहा हैलिखा था कभी वो मिटा जा रहा है सुना जा रहा न कहा...
बेटे ने लाख चाहा था, पाई न दे सकापापा के हाथ पहली कमाई न दे सका परबत की थी उम्मीद,...
कविता में भी घुसे हुए हैंशब्दों के व्यापारीचला रहे हैं खाल ओढ़करअपनी दुकानदारी संपादक हैं ,आयोजक हैंइनमें हैं कुछ नेताढूँढा...
शुभ मुहरत अक्षय तिथि हावय, कहिथें वेद पुरान।एही दिन तो सतयुग त्रेता, रचे रहिस भगवान।। चलौ मनाबो जुरमिल अक्ती, पावन...