मॉरीशस की एक खूबसूरत सी याद -मॉरीशस हो तुम
बस, तुम ही तो हो जो उत्ताल लहरों- सी उछलती समंदर की श्वेत बालू पर मेरे बदन से लिपट जाती...
बस, तुम ही तो हो जो उत्ताल लहरों- सी उछलती समंदर की श्वेत बालू पर मेरे बदन से लिपट जाती...
क्या खोना है, क्या पाना है, जो मिलना वो गुम जाना है .. सांसें होतीं खर्च सपन पर, दौड़ा-भागी है...
उसने मुझे समेटा और कहा, कोई मेरे बारे में कुछ भी कहे, तुम मानना वही, जो तुम्हारा मन स्वीकारे मैं...
सब के कहने से इरादा नहीं बदला जाता हमसे दरवेश का कुन्बा नहीं बदला जाता तुमने जो चीज़ जहाँ रक्खी...
बल्ली सिंह चीमा एक ऐसे गीतकार जो खेतों में गीत गाते हैं । 2 सितम्बर 1952 को चीमाखुर्द अमृतसर में...
रात जागा पाखी खुश होकर मौन बैठा है क्या करे " गूंगा केरी सरकरा खाए औ मुस्काए " चलिए मैं...
सोनहा बिहान के सपना ल जीवंत करइया कलावंत दाऊ महासिंह चंद्राकर हमर इहाँ जब कभू छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंच के सोनहा...
आज राजेन्द्र जी पर जब लिखने बैठी हूँ, ऐन सुबह का वही समय है जब वे अपने पढ़ने के टेबल...
"सूनी कलाई" राह तकती है तुम्हारी, आज यह सूनी कलाई.... स्मृति बस स्मृति ही , शेष है सूने नयन में...
मालिनी गौतम मैं इन दिनों बावन देवरी के प्रेम में हूँ। जगह के प्रेम में होना कोई ऐसी अनुभूति तो...