बच के रहना
बच के रहना… कोई गाँव हो या शहर बच के रहनाहवा में घुला है ज़हर बच के रहना दिखाई न...
बच के रहना… कोई गाँव हो या शहर बच के रहनाहवा में घुला है ज़हर बच के रहना दिखाई न...
मां मेरी आवाज सुननन्हे हाथ से तोड़ रहे पत्थरहथौड़े की आवाजमां, क्या सुन नहीं पातीतेरे ऊंचे गलियारे के नीचे देखचिलचिलाती...
दौर-ए-मुश्किल है हर इंसान परेशां है मगरये बुरा वक्त भीजाने के लिए आया है छुपा बैठा है घरों मेंहर एक...
तुमसे कहना है कहना है मुझे तुमसेवो अविस्मरणीय मीठी बात।झिलमिल चाँदनी कीवो मुलाकात सारी याद।। हरी-भरी पगडण्डियों मेंहमारा इठलाते गुजरना।चाँद-सितारे...
मौसम बदल गया है तो तू भी बदल के देख / दरवेश भारती दरवेश भारती » मौसम बदल गया है...
"खाली हाथ" आपदा का अवसर है,फायदा छोड़ दें|सेवा के कारक बनें,अहंकार तोड़ दें|मन में प्रतिज्ञा करें,काम शुरू कीजिए|जितना भी हो...
मेरे अन्दाज़ आज भी सबको पुराने लगते हैं।कल ही के तो सारे किस्से और फसाने लगते हैं।मैं वो काज ही...
समीक्षक- विभूति भूषण झा श्रीमती निमिषा सिंघल सर्वप्रथम “जब नाराज होगी प्रकृति” कविता संग्रह हेतु श्रीमती निमिषा सिंघलजी को मैं...
जनकवि की संवेदना व्यक्तिगत नहीं होती। उसकी रचनाओं में सार्वजनिक पीड़ा , मज़दूरों की जुझारू चेतना, व्यवस्था एवं प्रभुत्वसंपन्न वर्ग...
तोड़ वर्जना की हर बेड़ीमर्यादा का रखकर मान,आज चली भारत कीबेटी भरने नई उड़ान. सदियों पुरानी वो ज़ंजीरेंराहें जिनसे बाधित...